अम्मा बादः प्रत्येक मुस्लमान के लिए आपने को एक मुस्लमान कहना काफ़ी नहीं हैं, जब तक वह इस्लाम की समस्त प्रकार अच्छे और बहतरिन विधानों से अच्छी तरह वाक़िफ़ न हो, और उस की मुताबिक़ अमल न करें, क्योंकी समस्त प्रकार मुस्लमानों पर दायित्व है के इस्लाम की समस्त प्रकार विधान से वाक़ीफ़ होना और आपने को विजय के लिए उस विधान पर अमल करना। (समस्त प्रकार मुस्लमान पर दायित्व है) उस के बाद आपनि चिन्ता-फिक्र वसूल व विशवास के साथ मज़बूत व अटल करे, ताकी आपने को पृथ्वी में एक मुस्लमान प्रमाण करके एक विजयी ज़िन्दगी और इसके साथ साथ आखरत की ज़िन्दगी में एक विजयी दिलाएं ताकी स्वर्ग मिल सके।
और इस वजह से समस्त प्रकार मुस्लमानों पर दायित्व है की इस्लाम की समस्त प्रकार वसूल व आक़ायेद, और आला बिधानें व प्रकार को अर्जन के बाद आपना विश्वासों को सही करना और उस बिधानें पर अमल करना.
इस्लामि विधान तिन प्रकार है
1-वसूले द्बिन
2-फूरुये द्बिन
3-इस्लाम में सदाचार
जो व्यक्ति पवित्र इस्लाम के विशवास पर ईमान लाया और साथ साथ उसके फुरु व जुज़यात पर अमल करें आपने को इस्लाम के आदाब व आख़लाक़ की सून्दर पद्धति से सजाया वह पृथ्वी और स्वर्ग में विजयी होगा.
प्रथम भाग
उसूले आक़ायेद इस्लाम का सूची पत्र या (फिहरिस्त)
पवित्र इस्लाम धर्म में पाँच मौलिक है जिस को उसूले दीन कहते हैः[1]
1-तौहीद
2-अद्ल
3-नबूवत
4-इमामत
5-क़्यामत
[1] - वह आईन. व तरिका जो इंसानों को पृथ्वी व स्वर्ग में विजयी बताते है, उस्से नबी-इस्लाम कहते है।