
हज़रत आयतुल्लह अल् उज़मा सैय्यद सादिक़ शिराज़ी साहब आप 1360 हिजरी 20 जिल्क़द पवित्र शहर कर्बला (ईराक़) में जन्म लाभ किया. और विशेष विशेष उलामाए किराम व मुनीषी के पवित्र सेवा में रह कर धर्म निरपेक्षता पर ज्ञान अर्जन करके एक मशहूर मुज्तहिद बनें।
इस्लामी सम्प्रदाय के समस्त सम्मानी व्यक्ति आप को एक आलिम फकिह-व ज्ञानी मुज्तहिद के हिसाब से जानते है आपका तक़्वा परहैज़गारी व सदाचार को भी क़बूल करते है जिस में कोई शक नहीं है। आप हज़रत आयतुल्लह मुज़ाद्देद शिराज़ी के पवित्र सम्भ्रान्त व धार्मिक निरपेक्षता की सेवा में लालित-पालित हूए। आप परहैज़्गारी व तक़्वा-पारेसा में मशहूर है. और एक मुजतहीद घराने में परवरिश हूई है।
समस्त प्रकार आलिम और व्यक्तित्यपूर्ण व्यक्ति के साथ विभिन्न प्रकार विषय पर बहछ व गुफ्तगु जो इस यूग में साधारण तौर पर दुनिया के शिया सम्प्रदाय के बारेमें बारेमें रखता है उस विषय को समाधान करने पर भी मशहूर है। आप क़ुरआन, हदीस व फिकाह शास्त्र के ऊपर मुल्यवान पर्यालोचन के माध्यम अधिक से अधिक पुस्तकें लिखी है जो अंक़रीब उल्लेख होगा। यह व्यतीत जनसाधारण जनता के लिए भी कई पुस्तकें लिखी है जो उल्लेख के उपयूक्त है। आप के ग्रन्थों और पवित्र जीवनके बारेमें एक छोटी सा विबरण उल्लेख किया जा रहा है।
आप बीस बर्ष से अधिक समय तक धार्मिक ज्ञान-शिक्षा प्रदान करते हूए आरहै है. यह महान मशहूर मुज्तहीद अधिक से अधिक छात्र बनाए हैं जो इस यूग कौम, सीरीया और पृथ्वी के विभिन्न धार्मिक केन्द्र व संस्था में इस्लाम सम्प्रदाय की तबलीग़ प्रदान करने में मश्गूल है।
हज़रत आयतुल्लह अल् उज़मा सैय्यद सादिक़ शिराज़ी साहब फर्ज़न्द ज़ायेद इब्ने अली इब्नुल हुसैन इब्ने अली अमिरुल मुमेंनीन अलाईही व अलाई हिस् सलाम के पवित्र परीवार से बारेमें रखते है। और एक ऐसे मशहूर धार्मिक परीवार में लालित-पालित हुए है कि जो परीवार अतीत 150 बर्ष से (अपने प्रीय मुस्लमानों व अनुसारी को दिक निर्दशना और हिदाएत प्रदान करते हूए आरहै है) जिस में से कुछ सितारों के नाम नीचे उल्लेख़ किया जा रहा है।
1- शिया सम्प्रदाय के मार्जाए तक़्लीद हज़रत आयतुल्लह अल् उज़मा सैय्यद मुहम्मद हसन शिराज़ी (रा) ईरान में ब्रेटिश सर्कार के समय आप तमाक के बिरुद्ध एक निर्देश प्रदान किए थें मृत 1312 हिजरी।
2- मशहूर मार्जाए तक़्लीद हज़रत आयतुल्लह अल् उज़मा मिर्ज़ा मुहम्मद तक़ी शिराज़ी रहबरे इंक़िलाब 1920 मिलादी ईराक़. मृत 1338 सन हिजरी।
3-दुनिया शिया सम्प्रदाय के मशहूर मार्जाए तक़्लीद हज़रत आयतुल्लह अल् उज़मा सैय्यद अली शिराज़ी (रा) आप सैय्यद मुहम्मद हसन शिराज़ी (रा) के उपयूक्त-योग्व सम्भ्रान्त संतान है जो उस समय के नजफे अशरफ़ के एक मशहूर मर्जाए तक़्लीद थें मृत 1355 हिज़री।
4- हज़रत आयतुल्लह अल् उज़मा अक़ाए सैय्यद इस्माईल शिराज़ी (रा) मृत 1305।
5- मशहूर मार्जाए तक़्लीद हज़रत आयतुल्लह अल् उज़मा अक़ाए सैय्यद अब्दुल हादी शिराज़ी (रा) मृत ग्यारह सफर 1382।
6- हज़रत आयतुल्लह अल् उज़मा सैय्यद मिर्ज़ा महदी शिराज़ी (रा) आपके सम्मानी पिता उस यूग ईराक़ कर्बला शिया सम्प्रदाय के मर्जाए तक़्लीद थें. मृत 28 शाबान 1380 हिजरी।
7- पृथ्वी शिया सम्राज के मशहूर मार्ज़ाए तक़्लीद हज़रत आयतुल्लह अल् उज़मा सैय्यद मुहम्मद हुसैनी शिराज़ी (रा) आप 1442 हिजरी 2 शवल पृथ्वी को परीत्याग करके पर्वरदिगार से जा मिले।
8- हज़रत आयतुल्लह शहीद सैय्यद हसन शिराजी (रा) (आप सादिक़ शिराज़ी) सीरीया में हज़रत ज़ैनब (अ) के इतिहासिक व मशहूर रौज़ा पर एक महत्पूर्ण हौज़ए ईलमिया प्रतिष्ठा कि. आप अपने भ्रताके उपयूक्त भ्रता थे, ईराक़ के अत्याचारी साद्दाम के बास पार्टि के लोक व सैनिक के माध्यम आप को लूबनान बैरुत में 1400 हिजरी 16 जमादिऊस सानी में शाहीद किया गया है।
हज़रत आयतुल्लह अल् उज़मा सैय्यद सादिक़ शिराज़ी 20 ज़िल्क़द 1360 हिज़री (ईराक़) पवित्र शहर कर्बला में जन्म लाभ किया और विभिन्न प्रकार विषय के बारेमें विभिन्न गुरु और उलामाए किराम के सूदृष्ट सेवा और विशेष विशेष मार्जाए तक़्लीद की सेवा में रह कर एक व्यक्तित्व अर्जन करके पृथ्वी के एक मशहूर मार्जाए तक़्लीद और श्रेष्ठ मुजताहिद में परीवर्तन हो गए। आप के श्रद्धा भाजन गुरु का मुबारक व पवित्र नाम नीचे उल्लेख़ किया जा रहा हैः
1- आपके पिता मरहूम आयतुल्लह अल् उज़मा सैय्यद महदी हुसैनी शिराज़ी।
2- आपका श्रद्धा भाजन भाई मरहूम आयतुल्लह अल् उज़मा हाजी मूहम्मद हूसैनी शिराजी़।
3- मरहूम आयतुल्लह अल् उज़मा आक़ाए सैय्यद हादी मिलनी (रा)
4- मरहूम आयतुल्लह अल् उज़मा शैख़ मूहम्मद रिज़ा ईस्फाहानी।
5- मरहूम आयतुल्लह अल् उज़मा आक़ाए शैख़ मुहम्मद शाहरुदी।
6- मरहूम आयतुल्लह अल् उज़मा हाज़ी शैख़ मुहम्मद सूदुक़ी माज़न्दारानी ।
7- मरहूम आयतुल्लह अल् उज़मा हाजी शैख़ ज़फर रश्ती।
8- मरहूम आयतुल्लह अल् उज़मा सैय्यद काज़िम मुदर्रसी। और दूसरें गुरु भी पवित्र कर्बला में उपस्थित थें।
हज़रत आयतुल्लह अल् उज़मा सैय्यद सादिक़ शिराज़ी साहब बराबर धार्मिक व सामाजिक, संस्कृत व दान-खैरात प्रतिष्ठा परीचलना पर विशेष गुरुत्व प्रदान करते हूए आ रहै है उपस्थित समय अधिक से अधिक धार्मिक प्रतिष्ठान, स्कूल, माद्रासा, मस्ज़िद, किताबख़ाना, दवाख़ाना, व विभिन्न प्रकार प्रतिष्ठा व संस्था निर्माण किए है। और जनसाधारण का सेवा करने में भी मशगुल है।
मशहूर व विशेष मुनीषी महान मर्ज़ाए तक़्लीद हज़रत आयतुल्लह अल् उज़मा सैय्यद सादिक़ शिराज़ी साहब आप विशेष विशेष उलामाए किराम में से एक मशहूर आलिम है, आप का पाठ दान बैठक में कुएत ईरान, ईराक़ के छत्र वगैरह आपकी पवित्र सेवा में रह कर दीनि तालीम अर्जन करते है आपकी पाठदान मात्र खुलाछा के तौर पर किताब कि सूरत में कई पुस्तकें छप चुकी है।
पृथ्वी के मशहूर मर्ज़ाए तक़्लीद अपनी सदाचार में मशहूर-मारुफ़ है, और समस्त प्रकार जनसाधारण व्याक्तियों के साथ आपकी नेक अखलाक़, सदाचार, ज़ुहद, तक़्वा सब के साथ बराबर है बड़े छोटे में किसी प्रकार का कोई पार्थक नहीं है। लोग आप के सदाचार व ख़ुश्सदाचर को परीदर्शन करके अष्चर्य हो जाते है, अगर कोई व्यक्ति इस महान व्यक्तित्व को परीदर्शन करे तो सर्ब प्रथम आपकी नेक सदाचार और खुश आख़लाक़, ज़ुहद, तक़्वा, पारिसा, मुत्तक़ी, वगैरह को देखते है। यह व्यतीत आप अधिक गुणावली के अधिकार रखते है जो उल्लेख के उपयूक्त है। और सब समय आहले बैत (अ) के फिक्र और ऊनके समस्त प्रकार कार्यों-कर्मों को सरासर गिती में प्रकाश और तबलीग करने पर मस्रफ़ व मशगूल है।
इस यूग के मशहूर मर्ज़ाए तक़्लीद व श्रेष्ठ मुनीषी हज़रत आयतुल्लह अल् उज़मा सैय्यद सादिक़ शिराज़ी आप जवानीके से धर्मनिरपेक्षता के ऊपर विभिन्न प्रकार विषय पर विशेष करके फिक्ह, उसूल, विश्वास -अकाएद, और अतीत इतिहास के बारेमें अधिक से अधिक पुस्तकें लिखी है. जो पुस्तकें लिख चूके है उस में से कुछ सार के तौर पर उल्लेख किया जा रहा है।
यह किताब कई जिल्द की है जिस में से प्रथम जिल्द ईज्तेहाद और तक़्लीद के समपर्कित गुफ्तगु की गई है। प्रथम जिल्द में 72 प्रसगं है जो तक़्लीद और ईज्तेहाद के विषय के बारेमें रखता है।
और यह किताब 700 पृष्ठ पर मख़सूछ है जो बैरुत में छपी है. यह किताब दितीयबार पर्यालोचन करने के बाद एक हज़ार पृष्ठ से अधिक है जो अंक़रीब छपने वाली है।
बयानुल उसूल यह किताब कुल 10 (जिल्द) की है जिस में से प्रथम चार भाग में (काएदतुल ला ज़रार वला ज़रार) और बावे ईस्तहबाब के बारेमें लिख़े गए है जो चाप हो चुकी है।
इस किताब में बड़े गंभीर फिक्र और विबरण के साथ गुफ्तगू की गई है आप इस किताब को पवित्र शहर मुक़द्दस कुम में लिखी है। जो कई बार छपी है और शेष बार की तरह 1424 हिजरी कुम शहर में छपि है।
तावजी शरा-ए-ऊल इस्लाम. यह किताब मात्र (4 जिल्द का है) दर हक़ीक़त यह किताब अल्लामा हिल्ली (रा) की है। जिस किताब में आप विबरण व बिस्तृत के साथ विभिन्न प्रसगं को बिस्तृत के साथ जिस में से फिकह, ईबादत, मामेंलात, व ईक़ाअत वगैरह विषय पर अपना मुल्यवान वाणी प्रकाश की है। आपने इस किताब को पवित्र शहर कर्बला में विबरण व तफ़सील के साथ हाशिया लागाए है. जो ज्ञानी और मुनीषी व्यक्तियों के निकट मशहूर हत्ता विभिन्न स्कूल और कलेज वगैरह में पाठ किताब कि हैसियत से माना जा रहा है।
यह किताब मात्र (2 जिल्द का है) दर हक़ीक़त यह किताब अल्लामा हिल्ली (रा) की है, जिस में आप विभिन्न प्रकार गुरुत्वपूर्ण प्रसगं पर तफसील के साथ विशेष करके तहारत और दिआ के बारेमें पर्यालोचना की है।
प्रथम जिल्द आप कर्बला मुआल्ला में तालीफ़ कि है 1382, और इस जिल्द मात्र 468 पृष्ठ के साथ चाप हूई है और दूसरी जिल्द 534 पृष्ठ है जो कई बार छपि है लेकिन प्रथम बार की तरह पवित्र शहर नजफे अशरफ में छपि है 1382 हिजरी।
यह किताब मात्र (2 जिल्द है) (अल् बहज़ियाहूल मर्जियाह फि शर्हुल अल्फियाह) इस किताब को अस्ल लिख़ने वाला अल्लमा जलाल ऊद्दीन सीयूती, जो तमाम हौज़े और कलेज में दरस वाली किताब के हिसाब से मशहूर है, प्रथम जिल्द में आप कर्बला मुअल्ला 15 शाबान 1386 हिजरी क़मरी में हाशिया लागाएं जो 454 पृष्ठ पर है, और दूसरी जिल्द 444 पृष्ठ का है, यह किताब ज्ञानि और मुनीषी व्यकित्व के दर्मियान मशहूर होने के कारण से कई बार छपाना पढ़ा।
यह किताब फक़त 10 दस जिल्द का है, यह किताब तमाम जहत से कामिल है, शरहै लुमआ दमश्क़िया तालिफ़ शहीद सानी (रा) यह किताब मूख़तलिफ हौज़ा ईल्मिया में पाठ पुस्तक के हिसाब से बहूत मशहूर है, इन-शा-आल्लाह जल्दि बाजार में आने वाली है।
शिया सम्प्रदाय के महान नेता व मर्जाए तक़्लीद हज़रत आयतुल्लह अल् उज़मा सैय्यद सादिक़ शिराज़ी आहले बैत (अ) को प्रचार करने के लिए जो गुरुत्वपुर्ण भूमीका के साथ पुस्तकें लिखी है उस में से कुछ पुस्तकें ईशारे के तौर पर उल्लेख़ हो रही है।
यह किताब फक़त (2 जिल्द) इस किताब में 711 पवित्र कुरान मजीद के आयतों द्बारा हज़रत अली (अ) की शान और ऊनकी फज़ीलत के बारेमें जो आयतें नाज़िल हूई है, तमाम के तमाम आयतों को अहले सुन्नत वल जमाअत कि मशहूर किताबों से जमा किया गया है। आप इस किताब को पवित्र शहर कर्बला में लिखी है। प्रथम जिल्द में 404 पृष्ठ है और दूसरी जिल्द में 528 पृष्ठ है जो शेष बार कि तरह बैरुत में दारुल उलूम की तरफ़ से प्रकाशित हूई है।
फातिमा (फिल क़ुरआन) ज़हरा (अ), फातिमा ज़हरा (साः) के बारेमें क़ुरआन मजीद में जितनी आयतें है सब आयतों को सुन्नी मज़हब की मशहूर किताबों से जमा करके आप इस किताब को पवित्र शहर मशहदे मुक़द्दस 1408, 17 रजब को तमाम किया. यह किताब 360 पृष्ठ है जो कई बार छप चुकी है।
इस किताब में अहले बैत (अ) और ऊन की शान में जो आयतें नाज़िल हूई है अहले सुन्नत कि मशहूर किताबों से सूरए फातिहा से लेकर सूरए कौसर तक विभिन्न प्रकार आयतों को पर्या लोचना किया है। आपने इस किताब को कुएत अबस्थान जीवन में समाप्त किया, जो 407 पृष्ठ है।
शिया के बारेमें क़ुरआने मजीद में जितनी आयतें है समस्त आयतें व शाने नुज़ूल और तफ़्सीर व ताविल के साथ आहले सुन्नत वल जमाअत की मशहूर किताबों से विश्व के महान मर्ज़ाए तक़्लीद ने इस किताब की तालीफ़ की है।
इस किताब में बेशि से बेशि भाग हज़रत रसूल अकरम (साः) के वाणी और ऊनका कौल नक़्ल किया है. और समस्त प्रकार हदीस अहले सुन्नत की ग्रन्थों से जमा करके तालिफ़ की है। इस किताब को पवित्र शहर कर्बला में समाप्त क़रार दिया लेकिन यह किताब फक़त 126 पृष्ठ की है जो कई बार छप चुकी है लेकिन प्रथम बार की तरह बैरुत अल् वफा संस्था की पक्ष से 1400 हिजरी में छपि है।
इस किताब में शिया सम्प्रदाय के विश्वास और दुश्मन की पक्ष से जो संदेह प्रकाश हूई है आप ऊन समस्त प्रकार संदेह को रौशन दलील व बिस्तृत विबरण के साथ उत्तर दिया है।
महान मर्ज़ाए तक़्लीद इस किताब को पवित्र शहर कर्बला में समाप्त किया जो 80 पृष्ठ का है और कई बार छप चुकी है।
इस अध्याय में आपकी समस्त प्रकार उपदेश-नसीहत और उम्मते इसलामी के लिए ईर्शादात उल्लेख हूआ है।
इस किताब में क़्यास और इस्लाम के गुरुत्वपूर्ण सिद्धतं और दीन इस्लाम के बहस को केन्द्र क़रार दिया है। आप इस मुल्यवान किताब को पवित्र शहर कर्बला में तालीफ़ की है।
( इस्लाम में नमाज़े जमाअत की मनज़िलत और उस की अबस्थान)
इस किताब में नमाज़की फज़िलत और रसूल (साः) का विबरण किया हूआ हदीसें और नमाज़ का फल्सफा व दर्शन व उस की नियम-पद्धुती को विबरण के साथ बर्णना हूआ है, आपने इस किताब को कुएत अबस्थान जीवन में सम्पूर्ण किए है।
इस किताब में फल्सफा-ए-रुज़ा और उस के नियम-क़ानून व आहकाम समपर्क समस्त प्रकार प्रसगं को अधिक से अधिक सरल और आसान भाषा के माध्यम विबरण दिया है, आप इस किताब को कर्बला शहर में समाप्त और शहर नजफ़ में चाप किया है।
यह किताब कुएत में प्रकाश पाई है।
इस किताब में सुद की समस्य और विश्व के इक्ते़सादी समपर्क व उस के समस्य को समाधान का नियम-क़ानून के बारेमें गुफ्तगु की गई है, और यह किताब कुएत में छपी है।
इस किताब में विबरण व तफ़सीर के साथ हज़रत रसुले अकरम (साः) और हज़रत अली (अ) व अयेम्मह अत्हार (अ) के राजनीति और ऊनकी वाणी को नक़ल किया है, व यह किताब आप पवित्र शहर कर्बला में समाप्त किया जो 414 पृष्ठ का है और शेष बार कि तरह दारुल उलूम कि तरफ से प्रकाश हूई है।
इस किताब में हिज़ाब की ज़रुरत, और समाज़ में बि हिजाब के कारण और उस के समस्त प्रकार समस्य और उसके फँसाद को विबरण और तफसीर के साथ उल्लेख़ किया है और इस किताब को आपने पवित्र शहर कर्बला में समाप्त किया है।
आप इस किताब में तमाम प्रकार ज्ञानार्जन करने का प्रसगं कहानी उल्लेख किया है, और यह किताब आप शहर कर्बला में समाप्त किया और पवित्र शहर नजफ़ में प्रकाश किया. 1378 सन हिजरी कमरी।
इस्लाम-धर्म में हद और उस के समस्त प्रकार नियम-क़ानून को इस किताब में जमा किया है, और इस किताब को आप पवित्र शहर कर्बला में समाप्त किया और लूबनान बैरुत में प्रकाश पाने का सम्मान अर्जन किया।
यह एक ऐसी किताब है. जिस किताब में इसलामी बाकं के बारेमें जितने मौज़ूअ और उस का समस्य दुर करने के लिए पद्धती और बाकं के सुद और उस की समस्य को समाधान करने के पद्धती है इस किताब में आपने विबरण दिया है।
और इस्लामी बाकं के समस्त प्रकार कर्मोचारीयों को अपना गुरुत्वपूर्ण दायित्व को अंजाम व सम्पादन करने के लिए विधान और उपस्थित यूग और विश्व के इक्ते़सादी अबस्था के बारेमें परीष्कार और सरल भाषा में विबरण दिया है, यह किताब मात्र 104 पृष्ठ का है. जो 1992 साल में (ईराक़) पवित्र शहर कर्बला में तालीफ और दारुस सादिक़ 1972 साल बैरुत में प्रकाश पाई है।
मालिके अश्तर नख़ईः यह महान व्यक्ति सदरे इस्लाम मालिके अश्तर नख़ई. (रा) के व्यक्तित्व को अपना पवित्र कलम द्बारा तालीफ़ की है, और आप इस किताब को पवित्र शहर कर्बला में समाप्त किया. और 1387 हिजरी अल्गरी अल् हदीसे संस्था कि तरफ से पवित्र शहर नजफे अशरफ़ में प्रकाश किया।
इस किताब में सार के तौर पर शहीदे अवल की जीवन सम्पर्कित एक परीचय वर्णना हूआ हैः शैख़ शमसुद्दीन अबु अबदिल्लाह इब्ने जमालुद्दीन मक्कि फर्ज़न्द शम्सुद्दीन मुहम्मद मतलुबी दमश्क़ी अमली जज़नि हमदनी है। जनाब सादिक़ शिराज़ी साहब इस किताब को पवित्र शहर कर्बला में समाप्त किया और पवित्र शहर नजफे अशरफ़ में प्रकाश किया।
इस किताब में मरहूम शहीद सानी का जीवन परिचय को सार के तौर पर उल्लेख किया है, शहीदे सानी शैख़ ज़ैनुद्दीन अली इब्ने अहमद अल् जबल आमुलीः आपकी पवित्र जीवन को इस किताब में मर्ज़ाए तक़्लीद सैय्यद सादिक़ शिराज़ी साहब सार के तौर पर सुन्दर व सरल भाषा में उल्लेख़ किया है, इस किताब को पवित्र शहर कर्बला में समाप्त किया और पवित्र नजफे अशरफ़ में प्रकाश किया।
इस किताब में मरहूम आयतुल्लह अल् उज़मा आक़ाए सैय्यद हाजी मिर्ज़ा महदी शिराज़ी की जीवन परिचय को आपका सम्भ्रान्त संतान सैय्यद सादिक़ शिराज़ी महान मर्ज़ाए तक़्लीद आपके पिताके मशहूर वक़या. जो घटना व कहानी ज्ञानीयों के लिए ज्ञानार्ज़न के उपयूक्त है अपकी मृत बर्ष के ऊपलख से महान मर्ज़ाए तक़्लीद ने अपनी पवित्र क़लम द्बारा ग्रन्थों की शक्ल में ख़ूब सूरत वयान के साथ उल्लेख़ किया है।
ज़रुरी कथा यह है कि, जो किताबों का नाम ऊपर ज़िर्क हूआ है ऊन में से कुछ पुस्तकें विभिन्न भाषा में तर्ज़ुमा किया गया है ऊन भाषायों को निचे उल्लेख किया जा रहा है.
फार्सी, ईग्लिंस, उर्दु, अज़र, कुर्दी, बगांली, सुहाएली, हिन्दी, और विभिन्न प्रकार भाषा में तर्ज़ुमा किया गया है इस में से कुछ तर्जुमा की हूई पुस्तकें प्रकाश पाने का सम्मान अर्जन की है।
मर्हुम सैय्यद मुहम्मद हुसैन शिराज़ी साहब अपना सम्भ्रान्त भाई जनाब सादिक़ शिराज़ी साहब के उद्देश्व से इज्तेहाद का आदेश प्रदान किए है।
हज़रत आयतुल्लह अल् उज़मा सैय्यद मुहम्मद हूसैन शिराज़ी क़ुदस सिरह के ( तरफ) से सैय्यद सादिक़ हूसैन शिराज़ी साहब के उद्देश्व से इज्तेहाद का आदेश पत्र और ऊन की तक़्लीद समपर्क।
بسم الله الرحمن الرحيم
الحمد لله رب العلمين والصلاة والسلام علی محمد و آله الطاهرين
हज़रत आयतुल्लह अल् उज़मा सैय्यद सादिक़ हूसैन शिराज़ी साहब, वह इज्तेहाद के दर्जे पर कामियाब है, और मै ऊनके इज्तेहाद के लिए प्रमाण दे रहा हूँ कि वह एक मुज्तहीद के समस्त प्रकार शर्त व शराएत के मालिक है जैसा कि मै ने ऊन को परिदर्सन किया है।
इस विनापर इस्लाम धर्म के समस्त प्रकार प्रसगं समंध ऊन की तरफ रुजु करने का आदेश प्रदान करता हूँ, और ऊन का तक़्लीद व अनुशरण करना शरीयत की दृष्ट से जाएज़ व शुद्ध जानता हूँ. और मै ऊन को तक़्लीद व अनुशरण के उद्देश्व से अपने समस्त प्रकार शिया मोमीन-मुमिना भाई-भ्रता के लिए सुफारिश कर रहा हूँ कि समस्त प्रकार इस्लामी प्रसगं संमंध ऊन की अनुशरण करें। मात्र खुदा वन्दे आलाम है जो (सब को) मदद व सहायता करने वाला है।
मुहम्मद शिराज़ी
सिल व मुबारक मोहर