
इमाम हादि और इमाम हसन असकरी (अ) के रौज़ें मुबारक असम्मान होने के एक साल पूरे होने पर आयतुल्लह अल उज़मा सैय्यद सादिक़ शिराज़ी साहब का आफिस का बयान।
इमाम हादि और इमाम हसन असकरी (अ) के रौज़ें मुबारक असम्मान होने का पूरे एक साल गुज़र रहा है और इस के साथ साथ सरदावे गैबते इमामे ज़माना (अ) भी. लिहाज़ा ईराक़ सरकार-दौलत के लिए ज़रुरी है कि इस पवित्त स्थान और उसके तमाम प्रकार रास्ते को अत्याचार कारीयों से पवित्त करे और दितीयबार इस पवित्त स्थान को आबाद करने के लिए प्रचेष्टा करें।
इस के साथ साथ मज़लिस और पार्लिमेन्ट के लोगों का दायित्व है कि एक विधान बना कर सरकार पर ज़ोर दें ताकि उस पवित्त मज़ार को दितीयबार निर्माण करे. साथ साथ ज्ञानी व्यक्तियों को भी चाहिए अहलेबैत (अ) के समस्त प्रकार रौज़ायों को निर्माण करने के लिए जनसाधरण लोगों पर ज़ोर दें ताकि वह लोग भी अपनी अपनी सरकार पर भी ज़ोर लगायें। इस के साथ साथ अख़बारियों व पेपार वालों को भी चाहिए कि अहले बैत (अ) के सदूव्वहार व चरीत्त सम्पर्क प्रकाश्य तौर पर कथन करके जनसाधरण को इसलाम धर्म को संरक्षण करने के लिए आमादा करे। और सब अपनी अपनी हुकूमत और दायित्व व्यक्तियों पर ज़ोर दें ताकि उस रौज़ें को जलदी निर्माण के लिए आमादा हो जाए. और पूरे तरीके से इसलाम धर्म के समस्त प्रकार सामाजिक कामों का संरक्षण करे। चाहे यह संरक्षण कलम, भाषा, ज़बान, माल, दल, पार्टी, सरकार, हुकूमत, राज़नीति, व अन्य के माध्यम क्यों न हो इसलाम के मिराछ को संरक्षण करे।
साधाहरण जनता पर दायित्व है कि तज़ाहुरात अंज़ाम दें. व विभिन्न व्यक्तित्व के पास टेनीफोन करे ताकि इस बारगाह को दितीयबार निर्माण करे और इस के साथ साथ जन्नतूल बक़ीअ को भी निर्माण करें। इसी तरह प्रत्येक व्यक्ति पर वाजिब है कि मुख़तलीफ़ जलसा, बैठक व नुमाइश क़रार दें. ज़रुरी है कि हूकुमत व साज़ेमाने बैनुल मेलली पर ज़ोर दें ताकि इस काम को निन्दा क़रार दें। चुकीं अगर कोई व्यक्ति हक़ के लिए प्रतिरोध करे उस का हक़ एक दिन अदा होगा. और समस्त प्रकार दौलत पर वाज़िब है कि कम सम्प्रदाय के लोगों पर अच्छी तरह रफतार करे जैसा ख़ुदा वन्दे आलम ने फरमायाः और किसी के सियासत पर अपने को क़ुरवानी न करे चुकीं कुछ ऐसे व्यक्ति है जो अपनी कूरसी को संरक्षण करने के लिए बहुत कुछ कर सकते है और दूसरों के मक्कार मे फँसा सकते है।
ऊन व्यक्तियों का काम शैतान ज़ैसा है. इंसान से कहा गयाः तुम काफिर हो जाउगे, लेकिन जब काफिर हो गए उस से कहा गयाः मै तुम से नाराज़ हूँ चुकीं मै ख़ुदा वन्दे आलम से भय़ पाता हूँ।
हम सब. जब इस विषय़ पर ध्यान देगें तो मालूम हो जाएगा कि अकसर दुशमनाने इसलाम नासेबी इसलाम को बरबाद करने के लिए ख़ामोश नहीं बैठा था और इस काम को करने के लिए किसी तरह के काम से पीछे हटा नहीं था. जैसा कि आप हज़रात को मालूम है कि कई बार रौज़ेंए मुत्ह्हर हज़रत इमाम हूसैन (अ) ख़राब किया है. इस से पहले जन्नतु बक़ीअ को निस्त व नाबूद किया. इमामैन काज़मैन (अ) को ख़राब किया और ख़राब करने के पहले आग लगाई गई. क़ब्बे इमाम रिज़ा (अ) को व हज़रत अबूल फ़ज्ल अब्बास (अ) को आग लगाई. इमाम जफरे सादीक़ (अ) के पवीत्र गृह को आग लगाई, खैमे इमाम हूसैन (अ) को आग लगाई. इस के बाद ज़ाएरे इमाम हूसैन (अ) के लिए बम गिराया यह सब अत्याचारीयों के अत्याचार सुनने से शरम के मारे पसीने निकलने लगता है। लेकिन उन व्यक्तियों को मालूम होना चाहीए कि ख़ुदा वन्दे आलम ने पवीत्र क़ुरअन मज़ीद मे फरमाया हैः
(يابی الله إلاّ أن يتم نوره ولو کره الکافرون) ख़ुदा वन्दे आलम नहीं चाहता अपने नूर व्यतीत कोई चीज़ अपने कमाल पर पहूँच जाएं अगरचे काफिर नाराज़ क्यों न हो।. आज काल हम सब देख रहे है कि अहले बैत (अ) के नूर दिन बा दिन तरक़्की पर है और चारों तरफ तबलीग भी हो रहा है।
ख़ुदा वन्दे आलम से यह प्रर्थना करते है कि इस मोसीबत को अपनी उम्मत से बर तरफ कर लें और मुमीनीयों को उस पबीत्र मकान को दितीय बार निर्माण करने का तौफ़ीक़ करार दें. ख़ुदा वन्दे आलम ने फरमाया है किः
तुम मे से जो व्यक्ति इमान लाया और अच्छे काम अंज़ाम दिया अल्लहने उन व्यक्तियों से वादा किया है किः उन लोगोको ज़मीन पर जानसीन क़रार दूगां ज़िस तरह उस से पहले वालों को ख़िलाफ़त दि गयी थी. और इसलाम को अपने लिए पसन्द क़रार दे ---और अपने भय को इमान में परीवर्तन क़रार दे ताकि वह सब मेरी इबादत करें और अल्लह के लिए किसी एक को शरीक क़रार न दें। जो व्यक्ति इमान के बाद काफिर हो गए वह फासीक़ है।
इमाम हादि और इमाम हसन असकरी (अ) के रौज़ें मुबारक असम्मान होने पर आयतुल्लह अल उज़मा सैय्यद सादिक़ शिराज़ी साहब के अफिस का बयान।
इमाम हादी और इमाम हसन असकरी (अ) के नुरानी रौज़ें-ए मुबारक असम्मान करने या बम गिराने का काम एकमात्त नासेबीन और उसके सहायताकारीयों का काम है। हक़ीक़त में यह ख़ान्दाने रसूले पाक को असम्मान करना कर्बला से शुरु हूआ है और उसके बाद चलते चलते उनके पवित्त मज़ार शरीफ़ पर मुतावक्किल के ज़माने हज़रत इमाम हुसैन (अ) के पवित्त दरबार को ख़राब किया. उसके बाद वहाबीयों ने पवित्त मज़ार जन्नतुल बक़ीअ दरबारे इमाम, मासूम, हसन, सज्ज़ाद, बाकिर, व इमाम जफरे सादिक़ (अ) के रौज़ों को मिटिट के बराबर कर दिया।
हम इस बुरे काम को निन्दा करते हूए समस्त प्रकार मुमिनीयों के दृष्ट अकर्षण करना चाहते है।
1- जिन लोगोने इस काम को अंज़ाम देकर लाभ अर्ज़न करना चाहा ऊन व्यक्तियों की नियत थी कि समस्त प्रकार दल और ताईफ़ के अंदर मोसीबत पैदा करे ताकि अपने उद्देश्व तक पहूँच जाएं। लिहाज़ा इस काम से विरत रहने के लिए ज़रुरी है कि होशियारी से काम ले और दुश्मनों के जाल में न फसें, और सब अपने अपने मरजें के निर्देश को सम्मान प्रदर्शन करके समस्त प्रकार पवित्त स्थानो को असम्मान करने से विरत रहे। इस के साथ साथ शरीयत के निर्देश का भी पालन करे।
2- समस्त प्रकार सरकारों से यह कहा जाएं कि इस ख़राब और निन्दित काम के लिए निन्दा प्रकट करे और प्रत्येक प्रकार के निन्दा काम को मुका़बिला करके ख़राब काम करने वालों को पवित्त करें, ताकि वह सब अपने अपने उद्देश्व तक पहूँच न पाएं।
3- इस बूरा काम के लिए तज़ाहुरत करना, अपनी अपनी दोकानें बन्द करना, विभिन्न प्रकार दल और पार्टीयों को ख़बर देकर उस काम पर अपना गम व गुछ्छे को प्रकाट करना. विभिन्न राजनिती दीनी इसलामी व्यक्ति के निकट टेलीफोन करना ताकि यह सब व्यक्तित्व इस लज्जित काम के लिए निन्दा प्रकाट करें. यह भी एक तरह के निन्दायों में हिसाब किया जाता है।
4- हमारे लिए ज़रुरी है कि समस्त प्रकार दायित्य व्यक्तियों से कहा जाएं कि इस लज्जित और बूरा काम करने वालों से मूक़ाबिला करें और ऊन अत्याचारीयों व्यक्तियों से कभी पीछे न हटें ताकि वह लोग समज्ञ जाएं कि इस तरह के काम करना संम्भब नहीं है और न इस तरह के काम से किसी प्रकार का लाभ अर्ज़न किया जा सकता है. लिहाज़ा इस काम से विरत रहे।
5- जल्दी से जल्दी हरम शरीफ़ को दितीयवार निर्माण करना और उस के बाद उस को संरक्षण करने के लिए संरक्षक निर्दृष्ट करना और ऐसे विधान बनाना जिस से हरम शरीफ़ प्रत्येक प्रकार के दुख़ व मोसीबत से परीत्ताण मे रहे।
शेष प्रान्त दितीयवार इस मोसीबत के लिए मन भर दुख़ के साथ अपने पवित्त इमाम (अ) कि ख़िदमत में तसलीयत पेश करता हूँ और ख़ुदा बन्दे आलम से प्रार्थना करता हूँ जैसा कि तूने कुरआन मज़ीद में फरमाया है
(انّا من المجرمين منتقمون) मै गोनाहगार और अत्यचारी करने वालों से प्रतिशोध लुगां. पालने वाले तु इस बदकार और अत्याचार करने वालों से प्रतिशोध लेकर ऊन लोगों को बूरी स्थान पर पहूचा दें। ताकि ईराक़ में ईमान, शान्ति, और स्वाधिनता आजाएं।
आयतुल्लह अल उज़मा सैय्यद सादिक़ शिराज़ी साहब के अफिस से अफिस वालों का बयान।
23 मुहर्रम 1427, क़मरी

इमाम हादी और इमाम हसन असकरी (अ) के रौज़ें मुबारक को ख़राब होने के मुनासिबत से आयतुल्लह अल उज़मा सैय्यद सादिक़ शिराज़ी साहब का मुल्यवान भाषाका एक हिस्सा।
पवित्त मुहर्रम महीना जिस महीने में किसी तरह के ख़ुन या किसी एक का ख़ून करना हराम है, लेकिन यज़िदीयों ने इमाम हुसैन (अ) का पवित्त ख़ून गिरा कर इस महने का असम्मान प्रदर्शन किया। मुतावक्किल अब्बसी इमाम हुसैन (अ) के ज़रीह मुबारक को ख़राब किया, इस के साथ साथ कर्बला मुअल्ला और जन्नतुल बक़ीअ कबरस्खानों को ख़राब किया, इस के बाद इमामे पाक हज़रत इमाम अली इबने मोहम्मद अल हादि व इमाम हसन इब्ने अली अल असकरी (अ) के रौज़ें-ए मुबारक को ख़राब किया है। मै अपनी तरफ से इन समस्त प्रकार दुख़ को अपने मौला वलीउल्लह आक़ा इमामे ज़माना (अ) की ख़िदमत में तसलीयत पेश करता हूँ।
ख़ुदा वन्दे आलम से प्रर्थना करता हुँ कि हमारे मुसलमान के अंदर में से एसा कोई व्यक्ति आजाएं कि इन तमाम प्रकार ख़राब रास्ते को बन्द कर दे और शरीयत के समस्त निर्देश को परीपूण तरीके से अंज़ाम दें ।
बूधवार, 23 मुहर्रम, 1427 क़मरी।
सैय्यद सादिक़ शीराज़ि।